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रूस-यूक्रेन युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
एब्स्ट्रैक्ट:कोरोना महामारी के चलते पिछले 2 सालों में पूरे विश्व में आर्थिक मंदी देखने को मिली। पूरे विश्व में सब ओर अव्यवस्था फैली नज़र आई। वैश्विक बाज़ार से लेकर हर क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली। जिसके बाद संभावना जताई जा रही थी कि 2022 में सब ठीक हो जाएगा और सामाजिक,आर्थिक हालातों में सुधार होगा परंतु फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध ने विश्व पर एक बार फिर से ग्रहण लगा दिया और दुनिया इस युद्ध के बीच फंस गयी है।
कोरोना महामारी के चलते पिछले 2 सालों में पूरे विश्व में आर्थिक मंदी देखने को मिली। पूरे विश्व में सब ओर अव्यवस्था फैली नज़र आई। वैश्विक बाज़ार से लेकर हर क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली। जिसके बाद संभावना जताई जा रही थी कि 2022 में सब ठीक हो जाएगा और सामाजिक,आर्थिक हालातों में सुधार होगा परंतु फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध ने विश्व पर एक बार फिर से ग्रहण लगा दिया और दुनिया इस युद्ध के बीच फंस गयी है।
इस युद्ध का पूरी दुनिया पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। आयात निर्यात के साथ इसका सीधा प्रभाव ईंधन, तेल, ट्रांसपोर्ट,कृषि उत्पादों और बिजली उत्पादन पर पड़ा है। इस युद्ध की वजह से दुनिया में खाद्य सकंट गहराता जा रहा है। क्योंकि दोनों ही देश गेहूं के बड़े उत्पादक और निर्यातक देश हैं। इससे विश्व में महंगाई बढ़ रही जिसकी मार पूरा विश्व झेल रहा है। भू- राजनीति पर इसका असर दिखाई पड़ रहा है। अर्थशात्रियों ने अनुमान लगाया है कि इस युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार रूस- यूक्रेन युद्ध का असर पूरे विश्व पर पड़ रहा है परंतु यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों के हालात उनकी आर्थिक नीतियां की वजह से और खराब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों के लिए 2023 के आरंभिक महीने भी परेशानी भरे हो सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक 2022 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.8 रही, वहीं चीन की 3.2, जबकि अमेरिका 1.5 पर आ गया, वहीं जापान की वृद्धि दर 1.7 रही। इसी तरह रूस , फ्रांस एवं ब्रिटेन की वृद्धि दर 3.4, 2.5 व 3.6 रही। आईएमएफ द्वारा अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.1, चीन की 4.4 , वहीं अमेरिका की वृद्धि दर लुढ़क कर 1 पर आ जाएगी। वहीं ब्रिटेन,फ्रांस और रूस की वृद्धि दर में भी 2022 की तुलना में 2023 में गिरावट नज़र आएगी।
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